कोरोना वायरस: कोविड-19

कोरोना वायरस: कोविड-19 मरीज़ों की लाशों से संक्रमण फैल सकता है?

 अंतिम संस्कार

कोविड-19 से मरने वाले लोगों के शरीर में वायरस ज़िंदा रह सकते हैं. ऐसे में हम क्या पर्याप्त सावधानी बरतते हुए इन शवों का पूरी गरिमा से अंतिम संस्कार कर सकते हैं.
पूरी दुनिया इस वक़्त कोविड-19 के भयावह दौर से गुज़र रही है. तमाम देशों से कोरोना वायरस संक्रमण से मरने वालों की बेहद उदास करने वाली तस्वीरें आ रही हैं. ऐसी लाशें, जिनके नज़दीक उनके अपने भी मौजूद नहीं हैं.
कोरोना के शिकार हुए इन मरीज़ों की लाशें देखकर सिहरन पैदा होती है. यह मंज़र मौत और मरने वाले दोनों के प्रति डर पैदा करता है.
एक बड़ा डर इन लाशों के पोस्टमार्टम से संक्रमण फैलने का है. क्या कोरोना मरीज़ के शवों से संक्रमण फैल सकता है? क्या इन शवों को जला देना चाहिए या फिर इन्हें दफ़नाया जाना चाहिए? आइए, जानते हैं कि तथ्य क्या हैं?

कोरोना मरीज़ों के शवों से कोविड-19 फैल सकता है?

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक़ जब तक ज़रूरी सावधानियां बरती जाएं तब तक मरीज़ों के शवों से संक्रमण फैलने का कोई खतरा नहीं है.

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कोरोना

कोरोना: लॉकडाउन से मुसीबत में सुंदरबन के द्वीपों पर रहने वाले

सुंदरबन के गांव के लोग 

एक तरफ़ कुआं और दूसरी तरफ़ खाई वाली कहावत तो बहुत पुरानी है. लेकिन कोरोना की वजह से जारी देशव्यापी लॉकडाउन के दौरान यह कहावत पश्चिम बंगाल के सुंदरबन इलाक़े के लोगों पर एक बार फिर चरितार्थ हो रही है.
लॉकडाउन के दौरान घरों में बंद रहने की वजह से उनकी कमाई ठप हो गई है. लेकिन घरों से निकल कर जंगल के भीतर जाने पर जान का ख़तरा है. वैसे भी वन विभाग ने इस साल जंगल के भीतर प्रवेश के लिए ज़रूरी परमिट पर पाबंदी लगा दी है.
पश्चिम बंगाल में बांग्लादेश सीमा से सटा सुंदरबन इलाक़ा अपनी जैविक विविधता और मैंग्रोव के जंगल के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है. यह दुनिया में रॉयल बंगाल टाइगर का सबसे बड़ा घर भी है. इलाक़े के 54 द्वीपों पर इंसानी बस्तियां हैं. कोरोना के डर से इनमें से कई द्वीपों ने ख़ुद को मुख्यभूमि से काट लिया है.
वैसे इन द्वीपों की भौगोलिक स्थिति ही अब तक इनके लिए रक्षा कवच बनी है. बाहर से अब कोई वहां पहुंच नहीं रहा है. पहले जो लोग देश के विभिन्न हिस्सों से आए थे उनको भी जाँच के बाद 14 दिनों के लिए क्वारंटीन में रहना पड़ा था.
इन द्वीपों पर रहने वाले लोग मुख्य रूप से खेती, मछली पकड़ने और जंगल से शहद एकत्र कर अपनी आजीविका चलाते हैं. लॉकडाउन की वजह से वन विभाग ने इस साल इन कामों के लिए जंगल में प्रवेश करने का परमिट नहीं दिया है. 

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कोरोना महामारी

कोरोना महामारीः रेमडेसिविर दवा को अमरीका ने दी मंज़ूरी

जानकारों का कहना है कि इस दवा को रामबाण नहीं माना जाना चाहिए
जानकारों का कहना है कि इस दवा को रामबाण नहीं माना जाना चाहिए
अमरीका ने इबोला के इलाज की दवा रेमडेसिविर को गंभीर तौर पर बीमार कोरोना रोगियों के इलाज के लिए इस्तेमाल की मंज़ूरी दे दी है.
अमरीका के फ़ूड एंड ड्रग ऐडमिनिस्ट्रेशन के इस फ़ैसले के बाद अस्पतालों में भर्ती कोविड-19 के गंभीर मामलों में इस ऐंटी-वायरल दवा का उपयोग किया जा सकता है.
हाल ही में इस दवा के क्लीनिकल ट्रायल से पता चला कि इससे गंभीर तौर पर बीमार रोगी जल्दी ठीक हो सकते हैं.
हालाँकि, इससे लोगों के बचने की संभावना बहुत बढ़ जाती हो, ऐसा नहीं देखा गया.
जानकारों ने चेतावनी दी है कि इस दवा को कोरोना वायरस से बचने का रामबाण नहीं समझा जाना चाहिए.

 

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मस्जिद खोलने पर क्या इमरान ख़ान को डर

मस्जिद खोलने पर क्या इमरान ख़ान को डर से करना पड़ा सरेंडर

 कोरोना वायरस

रमज़ान की शुरुआत से कुछ दिन पहले दुनिया के अन्य देशों की तरह पाकिस्तान सरकार ने भी तय किया था कि कोविड-19 महामारी को कंट्रोल करने के लिए बनाई गई लॉकडाउन पॉलिसी को एक बार रिव्यू किया जाएगा.

लेकिन रिव्यू के आधार पर सरकार कोई निर्णय ले पाती, उससे पहले ही दो मौलवियों ने घोषणा कर दी कि सरकार का चाहे जो फ़ैसला हो, रमज़ान के दौरान मस्जिदें खुली रहेंगी.
14 अप्रैल को कराची में हुई एक प्रेस वार्ता में दो नामी धर्म गुरुओं, मुफ़्ती मुनीबुर्रहमान और मुफ़्ती तकी उस्मानी ने कहा कि 'मस्जिदें और मदरसे अनिश्चित काल के लिए बंद नहीं रह सकते, इसलिए रमज़ान के महीने में इन्हें खोला जाएगा और सामान्य दिनों की तरह मस्जिदों में नमाज़ पढ़ी जाएगी.'
लॉकडाउन के दौरान भी, पाकिस्तान में स्थानीय प्रशासन को मस्जिदों पर प्रतिबंध लगाने में बहुत परेशानी का सामना करना पड़ा.
देखा गया कि जिन मस्जिदों में भारी भीड़ जमा हो रही थी और पुलिस ने ऐसी मस्जिदों को बंद कराने की कोशिश की, तो रूढ़िवादी लोगों के समूह ने उन्हें दौड़ाया, उनके साथ हाथापाई की गई. सोशल मीडिया पर ऐसे कई वीडियो वायरल हुए जिनमें पुलिस के साथ भीड़ बदसलूकी कर रही है.




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कोरोना वायरस के पैदा होने पर ट्रंप सही

कोरोना वायरस के पैदा होने पर ट्रंप सही या उनकी ख़ुफ़िया एजेंसी

 डोनाल्ड ट्रंप

अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि उन्होंने इसके सबूत देखे हैं कि कोरोना वायरस चीन के लैब में ही बना है.
राष्ट्रपति ट्रंप की राय उनके ही देश की राष्ट्रीय ख़ुफ़िया एजेंसी से अलग है, जिसने दावा किया है कि कोरोना वायरस लैब में नहीं बना है.
अमरीकी नेशनल इंटेलिजेंस एजेंसी में डायरेक्टर के ऑफ़िस ने कहा है कि वे अब भी इसकी जाँच कर रहे हैं कि वायरस कहाँ से शुरू हुआ.
हालांकि उन्होंने कहा है कि वे निश्चित तौर पर कह सकते हैं कि कोरोना वायरस किसी व्यक्ति ने नहीं बनाया है और न ही ये जेनेटिकली मॉडिफ़ाइड है.
चीन पहले भी कई बार लैब में कोरोना वायरस को बनाए जाने का दावा ख़ारिज कर चुका है. साथ ही उसने कोरोना वायरस को लेकर अमरीका की ओर से उठाए गए क़दमों की भी आलोचना की है.

 

 

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लॉकडाउन 3.0

लॉकडाउन 3.0: जानें- 17 मई तक किस जोन में कितनी राहत और कहां मिलेगी छूट

गृह मंत्रालय ने शुक्रवार शाम को 2 और हफ्ते के लिए तीसरी बार लॉकडाउन बढ़ा दिया है. लॉकडाउन बढ़ने से अब 17 मई तक देश में रेल, मेट्रो और हवाई सेवा बंद रहेगी. तो स्कूल, कॉलेज और शिक्षण संस्थान भी नहीं खुलेंगे. साथ ही होटल और रेस्टोरेंट भी बंद रहेंगे. धार्मिक स्थल भी बंद रहेंगे. 

 2 और हफ्ते के लिए देश में बढ़ गया लॉकडाउन (फाइल-पीटीआई)

 

  • 17 मई तक बढ़ा लॉकडाउन, तीसरी बार बढ़ा
  • लॉकडाउन को चरणबद्ध तरीके से खोला जा रहा
  • मॉल, सिनेमा हॉल, होटल, स्कूल सब बंद रहेंगे
कोरोना के संक्रमण को देखते हुए देश में 2 चरणों में 40 दिनों का लॉकडाउन लगाया गया जो 3 मई को खत्म हो रहा था. लेकिन इसके खत्म होने से 2 दिन पहले ही गृह मंत्रालय ने 2 और हफ्ते यानी 17 मई तक लॉकडाउन को बढ़ाने का ऐलान कर दिया है. हालांकि लॉकडाउन को चरणबद्ध तरीके से खोला भी जा रहा है. 
रेल-मेट्रो-हवाई सेवा, सब बंद
गृह मंत्रालय ने शुक्रवार शाम को 2 और हफ्ते के लिए तीसरी बार लॉकडाउन बढ़ा दिया है. लॉकडाउन बढ़ने से अब 17 मई तक देश में रेल, मेट्रो और हवाई सेवा बंद रहेगी. तो स्कूल, कॉलेज और शिक्षण संस्थान भी नहीं खुलेंगे. साथ ही होटल और रेस्टोरेंट भी बंद रहेंगे. धार्मिक स्थल भी बंद रहेंगे. 17 मई तक मॉल, जिम और सिनेमा हॉल भी बंद रहेंगे.
हालांकि लॉकडाउन बढ़ाने के साथ-साथ चरणबद्ध तरीके से छूट भी दी गई है. गृह मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुसार रेड जोन की तुलना में ग्रीन और ऑरेंज जोन में पड़ने वाले जिलों में थोड़ी राहत दी गई है.
रेड जोन वाले क्षेत्रों के स्थानीय अधिकारियों को कहा गया है कि वे यह सुनिश्चित करें कि क्षेत्र के कंटेनमेंट जोन के सभी निवासियों के पास आरोग्य सेतु एप डाउनलोड हो. कंटेनमेंट जोन में एप के जरिए सभी पर निगरानी रखी जा सकेगी. कंटेनमेंट जोन में किसी तरह की कोई गतिविधि नहीं होगी.
साथ ही चिकित्सा आपात स्थिति को छोड़कर और आवश्यक वस्तुओं तथा सेवाओं की आपूर्ति बनाए रखने के लिए इन जोन के भीतर और बाहर लोगों की आवाजाही नहीं होगी.

सभी जोन में हवाई, रेल, मेट्रो और सड़क मार्ग द्वारा अंतर-राज्यीय आवागमन बंद रहेगा. साथ ही स्कूलों, कॉलेजों, और अन्य शैक्षिक और प्रशिक्षण/कोचिंग संस्थानों का संचालन; होटल और रेस्तरां; सार्वजनिक समारोह, सिनेमा हॉल, मॉल, जिम, स्पोटर्स कॉम्प्लेक्स आदि बंद रहेंगे.
इसके अलावा सामाजिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक और अन्य प्रकार की सभाओं के साथ-साथ धार्मिक स्थलों भी बंद रहेंगे. विशेष परिस्थितियों में और गृह मंत्रालय की अनुमति पर ही हवाई, रेल और सड़क मार्ग से जाने की अनुमति दी जाएगी.



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CONSTITUTION OF INDIA

CONSTITUTION OF INDIA
                       

National honour – Indian Ekta




 किस अनुच्‍छेद में क्‍या है- चलिये जानते है-

अनुच्छेद 1 :- संघ का नाम और राज्य क्षेत्र
अनुच्छेद 2 :- नए राज्यों का प्रवेश या स्थापना
अनुच्छेद 3 :- राज्य का निर्माण तथा सीमाओं या नामों मे परिवर्तन
अनुच्छेद 4 :- पहली अनुसूचित व चौथी अनुसूची के संशोधन तथा दो और तीन के अधीन बनाई गई विधियां
अनुच्छेद 5 :- संविधान के प्रारंभ पर नागरिकता
अनुच्छेद 6 :- भारत आने वाले व्यक्तियों को नागरिकता
अनुच्छेद 7 :-पाकिस्तान जाने वालों को नागरिकता
अनुच्छेद 8 :- भारत के बाहर रहने वाले व्यक्तियों का नागरिकता
अनुच्छेद 9 :- विदेशी राज्य की नागरिकता लेने पर नागरिकता का ना होना
अनुच्छेद 10 :- नागरिकता के अधिकारों का बना रहना
अनुच्छेद 11 :- संसद द्वारा नागरिकता के लिए कानून का विनियमन
अनुच्छेद 12 :- राज्य की परिभाषा
अनुच्छेद 13 :- मूल अधिकारों को असंगत या अल्पीकरण करने वाली विधियां
अनुच्छेद 14 :- विधि के समक्ष समानता
अनुच्छेद 15 :- धर्म जाति लिंग पर भेद का प्रतिशेध
अनुच्छेद 16 :- लोक नियोजन में अवसर की समानता
अनुच्छेद 17 :- अस्पृश्यता का अंत
अनुच्छेद 18 :- उपाधीयों का अंत
अनुच्छेद 19 :- वाक् की स्वतंत्रता
अनुच्छेद 20 :- अपराधों के दोष सिद्धि के संबंध में संरक्षण
अनुच्छेद 21 :-प्राण और दैहिक स्वतंत्रता
अनुच्छेद 21 क :- 6 से 14 वर्ष के बच्चों को शिक्षा का अधिकार
अनुच्छेद 22 :- कुछ दशाओं में गिरफ्तारी से सरंक्षण
अनुच्छेद 23 :- मानव के दुर्व्यापार और बाल आश्रम
अनुच्छेद 24 :- कारखानों में बालक का नियोजन का प्रतिशत
अनुच्छेद 25 :- धर्म का आचरण और प्रचार की स्वतंत्रता
अनुच्छेद 26 :-धार्मिक कार्यों के प्रबंध की स्वतंत्रता
अनुच्छेद 29 :- अल्पसंख्यक वर्गों के हितों का संरक्षण
अनुच्छेद 30 :- शिक्षा संस्थाओं की स्थापना और प्रशासन करने का अल्पसंख्यक वर्गों का अधिकार
अनुच्छेद 32 :- अधिकारों को प्रवर्तित कराने के लिए उपचार
अनुच्छेद 36 :- परिभाषा
अनुच्छेद 40 :- ग्राम पंचायतों का संगठन
अनुच्छेद 48 :- कृषि और पशुपालन संगठन
अनुच्छेद 48क :- पर्यावरण वन तथा वन्य जीवों की रक्षा
अनुच्छेद 49:- राष्ट्रीय स्मारक स्थानों और वस्तुओं का संरक्षण
अनुछेद. 50 :- कार्यपालिका से न्यायपालिका का प्रथक्करण
अनुच्छेद 51 :- अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा
अनुच्छेद 51क :- मूल कर्तव्य
अनुच्छेद 52 :- भारत का राष्ट्रपति
अनुच्छेद 53 :- संघ की कार्यपालिका शक्ति
अनुच्छेद 54 :- राष्ट्रपति का निर्वाचन
अनुच्छेद 55 :- राष्ट्रपति के निर्वाचन की रीती
अनुच्छेद 56 :- राष्ट्रपति की पदावधि
अनुच्छेद 57 :- पुनर्निर्वाचन के लिए पात्रता
अनुच्छेद 58 :- राष्ट्रपति निर्वाचित होने के लिए आहर्ताए
अनुच्छेद 59 :- राष्ट्रपति पद के लिए शर्ते
अनुच्छेद 60 :- राष्ट्रपति की शपथ
अनुच्छेद 61 :- राष्ट्रपति पर महाभियोग चलाने की प्रक्रिया
अनुच्छेद 62 :- राष्ट्रपति पद पर व्यक्ति को भरने के लिए निर्वाचन का समय और रीतियां
अनुच्छेद 63 :- भारत का उपराष्ट्रपति
अनुच्छेद 64 :- उपराष्ट्रपति का राज्यसभा का पदेन सभापति होना
अनुच्छेद 65 :- राष्ट्रपति के पद की रिक्त पर उप राष्ट्रपति के कार्य
अनुच्छेद 66 :- उप-राष्ट्रपति का निर्वाचन
अनुच्छेद 67 :- उपराष्ट्रपति की पदावधि
अनुच्छेद 68 :- उप राष्ट्रपति के पद की रिक्त पद भरने के लिए निर्वाचन
अनुच्छेद69 :- उप राष्ट्रपति द्वारा शपथ
अनुच्छेद 70 :- अन्य आकस्मिकता में राष्ट्रपति के कर्तव्यों का निर्वहन
अनुच्छेद 71. :- राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के निर्वाचन संबंधित विषय
अनुच्छेद 72 :-क्षमादान की शक्ति
अनुच्छेद 73 :- संघ की कार्यपालिका शक्ति का विस्तार
अनुच्छेद 74 :- राष्ट्रपति को सलाह देने के लिए मंत्रिपरिषद
अनुच्छेद 75 :- मंत्रियों के बारे में उपबंध
अनुच्छेद 76 :- भारत का महान्यायवादी
अनुच्छेद 77 :- भारत सरकार के कार्य का संचालन
अनुच्छेद 78 :- राष्ट्रपति को जानकारी देने के प्रधानमंत्री के कर्तव्य
अनुच्छेद 79 :- संसद का गठन
अनुच्छेद 80 :- राज्य सभा की सरंचना
अनुच्छेद 81 :- लोकसभा की संरचना
अनुच्छेद 83 :- संसद के सदनो की अवधि
अनुच्छेद 84 :-संसद के सदस्यों के लिए अहर्ता
अनुच्छेद 85 :- संसद का सत्र सत्रावसान और विघटन
अनुच्छेद 87 :- राष्ट्रपति का विशेष अभी भाषण
अनुच्छेद 88 :- सदनों के बारे में मंत्रियों और महानयायवादी अधिकार
अनुच्छेद 89 :-राज्यसभा का सभापति और उपसभापति
अनुच्छेद 90 :- उपसभापति का पद रिक्त होना या पद हटाया जाना
अनुच्छेद 91 :-सभापति के कर्तव्यों का पालन और शक्ति
अनुच्छेद 92 :- सभापति या उपसभापति को पद से हटाने का
संकल्प विचाराधीन हो तब उसका पीठासीन ना होना
अनुच्छेद 93 :- लोकसभा का अध्यक्ष और उपाध्यक्ष
अनुचित 94 :- अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का पद रिक्त होना
अनुच्छेद 95 :- अध्यक्ष में कर्तव्य एवं शक्तियां
अनुच्छेद 96 :- अध्यक्ष उपाध्यक्ष को पद से हटाने का संकल्प हो तब उसका पीठासीन ना होना
अनुच्छेद 97 :- सभापति उपसभापति तथा अध्यक्ष,उपाध्यक्ष के वेतन और भत्ते
अनुच्छेद 98 :- संसद का सविचालय
अनुच्छेद 99 :- सदस्य द्वारा शपथ या प्रतिज्ञान
अनुच्छेद 100 - संसाधनों में मतदान रिक्तियां के होते हुए भी
सदनों के कार्य करने की शक्ति और गणपूर्ति
अनुच्छेद 108* :- कुछ दशाओं में दोनों सदनों की संयुक्त बैठक
अनुत्छेद 109 :- धन विधेयक के संबंध में विशेष प्रक्रिया
अनुच्छेद 110 :- धन विधायक की परिभाषा
अनुच्छेद 111 :- विधेयकों पर अनुमति
अनुच्छेद 112 :- वार्षिक वित्तीय विवरण
अनुच्छेद 118 :- प्रक्रिया के नियम
अनुच्छेद 120 :- संसद में प्रयोग की जाने वाली भाषा
अनुच्छेद 123 :- संसद विश्रांति काल में राष्ट्रपति की अध्यादेश शक्ति
अनुच्छेद 124 :- उच्चतम न्यायालय की स्थापना और गठन
अनुच्छेद 125 :- न्यायाधीशों का वेतन
अनुच्छेद 126 :- कार्य कार्य मुख्य न्याय मूर्ति की नियुक्ति
अनुच्छेद 127 :- तदर्थ न्यायमूर्तियों की नियुक्ति
अनुच्छेद 128 :- सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की उपस्थिति
अनुच्छेद 129 :- उच्चतम न्यायालय का अभिलेख नयायालय होना
अनुच्छेद 130 :- उच्चतम न्यायालय का स्थान
अनुच्छेद 131 :- उच्चतम न्यायालय की आरंभिक अधिकारिता
अनुच्छेद 137 :- निर्णय एवं आदेशों का पुनर्विलोकन
अनुच्छेद 143 :- उच्चतम न्यायालय से परामर्श करने की राष्ट्रपति की शक्ति
अनुच्छेद144 :-सिविल एवं न्यायिक पदाधिकारियों द्वारा उच्चतम न्यायालय की सहायता
अनुच्छेद 148 :- भारत का नियंत्रक महालेखा परीक्षक
अनुच्छेद 149 :- नियंत्रक महालेखा परीक्षक के कर्तव्य शक्तिया
अनुच्छेद 150 :- संघ के राज्यों के लेखन का प्रारूप
अनुच्छेद 153 :- राज्यों के राज्यपाल
अनुच्छेद 154 :- राज्य की कार्यपालिका शक्ति
अनुच्छेद 155 :- राज्यपाल की नियुक्ति
अनुच्छेद 156 :- राज्यपाल की पदावधि
अनुच्छेद 157 :- राज्यपाल नियुक्त होने की अर्हताएँ
अनुच्छेद 158 :- राज्यपाल के पद के लिए शर्तें
अनुच्छेद 159 :- राज्यपाल द्वारा शपथ या प्रतिज्ञान
अनुच्छेद 163 :- राज्यपाल को सलाह देने के लिए मंत्री परिषद
अनुच्छेद 164 :- मंत्रियों के बारे में अन्य उपबंध
अनुच्छेद 165 :- राज्य का महाधिवक्ता
अनुच्छेद 166 :- राज्य सरकार का संचालन
अनुच्छेद 167 :- राज्यपाल को जानकारी देने के संबंध में मुख्यमंत्री के कर्तव्य
अनुच्छेद 168 :- राज्य के विधान मंडल का गठन
अनुच्छेद 170 :- विधानसभाओं की संरचना
अनुच्छेद 171 :- विधान परिषद की संरचना
अनुच्छेद 172 :- राज्यों के विधानमंडल कि अवधी
अनुच्छेद 176 :- राज्यपाल का विशेष अभिभाषण
अनुच्छेद 177 सदनों के बारे में मंत्रियों और महाधिवक्ता के अधिकार
अनुच्छेद 178 :- विधानसभा का अध्यक्ष और उपाध्यक्ष
अनुच्छेद 179 :- अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का पद रिक्त होना या पद से हटाया जाना
अनुच्छेद 180 :- अध्यक्ष के पदों के कार्य व शक्ति
अनुच्छेद 181 :- अध्यक्ष उपाध्यक्ष को पद से हटाने का कोई
संकल्प पारित होने पर उसका पिठासिन ना होना
अनुच्छेद 182 :- विधान परिषद का सभापति और उपसभापति
अनुच्छेद 183 :- सभापति और उपासभापति का पद रिक्त होना पद त्याग या पद से हटाया जाना
अनुच्छेद 184 :- सभापति के पद के कर्तव्यों का पालन व शक्ति
अनुच्छेद 185 :- संभापति उपसभापति को पद से हटाए जाने का संकल्प विचाराधीन होने पर उसका पीठासीन ना होना
अनुच्छेद 186 :- अध्यक्ष उपाध्यक्ष सभापति और उपसभापति के वेतन और भत्ते
अनुच्छेद 187 :- राज्य के विधान मंडल का सविचाल.
अनुच्छेद 188 :- सदस्यों द्वारा शपथ या प्रतिज्ञान
अनुच्छेद 189 :- सदनों में मतदान रिक्तियां होते हुए भी साधनों का कार्य करने की शक्ति और गणपूर्ति
अनुच्छेद 199 :- धन विदेश की परिभाषा
अनुच्छेद 200 :- विधायकों पर अनुमति
अनुच्छेद 202 :- वार्षिक वित्तीय विवरण
अनुच्छेद 213 :- विधनमंडल में अध्यादेश सत्यापित करने के राज्यपाल की शक्ति
अनुच्छेद 214 :- राज्यों के लिए उच्च न्यायालय
अनुच्छेद 215 :- उच्च न्यायालयों का अभिलेख न्यायालय होना
अनुच्छेद 216 :- उच्च न्यायालय का गठन
अनुच्छेद 217 :- उच्च न्यायालय न्यायाधीश की नियुक्ति पद्धति शर्तें
अनुच्छेद 221 :- न्यायाधीशों का वेतन
अनुच्छेद 222 :- एक न्यायालय से दूसरे न्यायालय में न्यायाधीशों का अंतरण
अनुच्छेद 223 :- कार्यकारी मुख्य न्याय मूर्ति के नियुक्ति
अनुच्छेद 224 :- अन्य न्यायाधीशों की नियुक्ति
अनुच्छेद 226 :- कुछ रिट निकालने के लिए उच्च न्यायालय की शक्ति
अनुच्छेद 231 :- दो या अधिक राज्यों के लिए एक ही उच्च न्यायालय की स्थापना
अनुच्छेद 233 :- जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति



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कोरोना लॉकडाउन 2

कोरोना लॉकडाउन: सुप्रीम कोर्ट ने वकीलों को नहीं दी राहत, कहा-कल आर्किटेक्ट आएंगे, परसो इंजीनियर

 suprem court

सुप्रीम कोर्ट ने लॉकडाउन के कारण वकीलों को आर्थिक मदद और चैम्बर किराये में छूट संबंधी दो अलग-अलग याचिकाओं पर कोई आदेश जारी करने यह कहते हुए गुरुवार को इन्कार कर दिया कि जब पूरा देश ही कठिन दौर से गुजर रहा है तो वह वकीलों के लिए विशेष फंड बनाने का आदेश कैसे दे सकता है? 
न्यायमूर्ति एन वी रमन, न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति बी आर गवई की खंडपीठ ने दो याचिकाओं की संयुक्त सुनवाई करते हुए कहा कि पूरा देश ही कठिन दौर से गुजर रहा है, फिर वह वकीलों के लिए विशेष कोष बनाने का आदेश कैसे सकती है? 
उन्होंने कहा, “पूरा देश आर्थिक तंगी से गुज रहा है, ऐसे में वकीलों को छूट कैसे दे दें? हमारे पास वकीलों को देने के लिए खुद का फंड भी नहीं है। वकीलों के हितों की रक्षा के लिए विधिज्ञ परिषद है, लेकिन हम उसे इस संबंध में कोई आदेश नहीं दे सकते।”
याचिकाकर्ता पवन प्रकाश पाठक की दलील थी कि लॉकडाउन में काम न होने के कारण बहुत से नए वकील आर्थिक परेशानी का सामना कर रहे  हैं। ऐसे वकीलों की आर्थिक मदद के लिए फंड बनाने का आदेश जारी किया जाए, लेकिन न्यायमूर्ति रनम ने कोई भी आदेश जारी करने से इन्कार कर दिया। 
दूसरी याचिका सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन की थी, जिसकी दलील थी कि लॉकडाउन की वजह से वकीलों की कमाई नहीं हो रही। इसलिए उन्हें चैम्बर का किराया लॉकडाउन की अवधि में देने से छूट प्रदान की जाए। एक वकील तभी किराया दे सकता है, जब वह खुद काम करके कमाए। न्यायालय ने यह मांग भी यह कहते हुए खारिज कर दी, “वकीलों को कोई विशेष छूट कोर्ट नहीं दे सकता। आज आप आए हैं, कल आर्किटेक्ट भी ऐसी मांग लेकर कोर्ट में आ जाएंगें। परसों इंजीनियर भी सुप्रीम कोर्ट आ जाएंगे। देश के सभी तबके इन दिनों प्रभावित हैं।” 
न्यायमूर्ति रमन ने कहा, “कई मामलों में बुजुर्ग मकान मालिक भी किराये पर निर्भर करता है। लॉकडाउन के कारण किराए पर रहने वाले देश के बहुत से लोग परेशान है तो वकीलों को विशेष छूट क्यों दें? कोर्ट वकीलों को विशेष या अलग कैटेगरी में नहीं रख सकता।” बाद में याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका वापस ले ली।

 

केन्द्र ने राज्यों से कहा

केन्द्र ने राज्यों से कहा, आपूर्ति बरकरार रखने के लिए ट्रकों की मुक्त आवाजाही सुनिश्चित करें

 ensure free movement of trucks to maintain supplies  centre tells states  file pic

केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने गुरुवार को सभी राज्यों से कहा है कि वे कोरोना लॉकडाउन के बीच ट्रकों व माल लेकर जा रही गाड़ियों की मुक्त आवाजाही सुनिश्चित करे ताकि देश में वस्तुओं और सेवाओं की आपूर्ति बरकरार रहे। केन्द्रीय गृह सचिव अजय भल्ला ने राज्यों के मुख्य सचिवों को लिखे पत्र में ट्रैफिक आवाजाही के मंत्रालय के पहले के आदेश का हवाला दिया है।
भल्ला ने लिखा, “राज्य के कई हिस्सों में अंतरराज्यीय सीमा पर ट्रकों की आवाजाही की इजाजत नहीं दी जा रही है और स्थानीय अथॉरिटीज की तरफ से उनसे अलग से पास मांगा जा रहा है जबकि सड़क पर जा रहे खाली या सामानों से भरे ट्रकों को किसी तरह को कोई अन्य पास की जरूरत नहीं है। लॉकडाउन के दौरान वस्तुओं और सेवाओं की आपूर्ति बहाल रखने के लिए यह आवश्यक है।”
गृह मंत्रालय के प्रवक्ता ने ट्वीट करते हुए कहा, “ट्रकों व माल ढुलाई की गाड़ियां में जिनमें खाली ट्रक में शामिल हैं, इनकी मुक्त आवाजाही सुनिश्चित हो। स्थानीय अथॉरिटीज देशभर के अंतरराज्यीय सीमा पर अलग पास की मांग पर जोर न दें। देश में वस्तुओं और सेवाओं की आपूर्ति बरकरार रखने के लिए यह आवश्यक है।”

ये भी पढ़ें: 'कोरोना के मद्देनजर भारत से 60 हजार विदेशी नागरिकों को वापस भेजा गया'

15 अप्रैल के गृह मंत्रालय के आदेश में कहा गया था, “सभी ट्रकों और अन्य माल गाड़ियों की आवाजाही जिनमें 2 ड्राईवर और एक हेल्पर हो और ड्राईवर के पास मान्य लाइसेंस हो। इनमें खाली ट्रक/गाड़ियां भी शामिल हैं उन्हें आने जाने की इजात है वो चाहे सामान की ढुलाई कर वापस आ रही हो या फिर लेने जा रही हो।”
मंगलवार को गृह मंत्रालय ने कहा था कि लॉकडाउन के खत्म होने के एक दिन बार 4 अप्रैल से वे कई और रियायतें देना का ऐलान करेंगे। गौरतलब है कि अंतरराज्यीय ट्रैफिक मूवमेंट बंद है। कुछ राज्यों ने कोरोना को रोके के लिए पूरी तरह से बॉर्डर को सील कर रखा है, जिसकी वजह से इस तरह की दिक्कतें आ रही हैं।







केन्द्र की नई गाइडलाइन

केन्द्र की नई गाइडलाइन से क्या सभी प्रवासियों को मिल गई है यात्रा की इजाजत?

bihar cm nitish kumar thanks narendra modi government uttarakhand jharkhand planning for migrant wor

सुप्रीम कोर्ट ने लॉकडाउन के कारण वकीलों को आर्थिक मदद और चैम्बर किराये में छूट संबंधी दो अलग-अलग याचिकाओं पर कोई आदेश जारी करने यह कहते हुए गुरुवार को इन्कार कर दिया कि जब पूरा देश ही कठिन दौर से गुजर रहा है तो वह वकीलों के लिए विशेष फंड बनाने का आदेश कैसे दे सकता है? 
न्यायमूर्ति एन वी रमन, न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति बी आर गवई की खंडपीठ ने दो याचिकाओं की संयुक्त सुनवाई करते हुए कहा कि पूरा देश ही कठिन दौर से गुजर रहा है, फिर वह वकीलों के लिए विशेष कोष बनाने का आदेश कैसे सकती है? 
उन्होंने कहा, “पूरा देश आर्थिक तंगी से गुज रहा है, ऐसे में वकीलों को छूट कैसे दे दें? हमारे पास वकीलों को देने के लिए खुद का फंड भी नहीं है। वकीलों के हितों की रक्षा के लिए विधिज्ञ परिषद है, लेकिन हम उसे इस संबंध में कोई आदेश नहीं दे सकते।”
याचिकाकर्ता पवन प्रकाश पाठक की दलील थी कि लॉकडाउन में काम न होने के कारण बहुत से नए वकील आर्थिक परेशानी का सामना कर रहे  हैं। ऐसे वकीलों की आर्थिक मदद के लिए फंड बनाने का आदेश जारी किया जाए, लेकिन न्यायमूर्ति रनम ने कोई भी आदेश जारी करने से इन्कार कर दिया। 
दूसरी याचिका सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन की थी, जिसकी दलील थी कि लॉकडाउन की वजह से वकीलों की कमाई नहीं हो रही। इसलिए उन्हें चैम्बर का किराया लॉकडाउन की अवधि में देने से छूट प्रदान की जाए। एक वकील तभी किराया दे सकता है, जब वह खुद काम करके कमाए। न्यायालय ने यह मांग भी यह कहते हुए खारिज कर दी, “वकीलों को कोई विशेष छूट कोर्ट नहीं दे सकता। आज आप आए हैं, कल आर्किटेक्ट भी ऐसी मांग लेकर कोर्ट में आ जाएंगें। परसों इंजीनियर भी सुप्रीम कोर्ट आ जाएंगे। देश के सभी तबके इन दिनों प्रभावित हैं।” 
न्यायमूर्ति रमन ने कहा, “कई मामलों में बुजुर्ग मकान मालिक भी किराये पर निर्भर करता है। लॉकडाउन के कारण किराए पर रहने वाले देश के बहुत से लोग परेशान है तो वकीलों को विशेष छूट क्यों दें? कोर्ट वकीलों को विशेष या अलग कैटेगरी में नहीं रख सकता।” बाद में याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका वापस ले ली।

 

कोरोना संकट:

कोरोना संकट: बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल ने बढ़ाई चिंता, खतरनाक जोन के रूप में उभर सकते हैं तीनों राज्य

bihar jharkhand and west bengal likely to be in danger zone of coronavirus  maharashtra and gujrat h

भारत में भले ही महाराष्ट्र और गुजरात में कोरोना संक्रमण के तेजी से बढ़ते मामलों की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है, लेकिन एक कंप्यूटर मॉडल से किए गए हालिया विश्लेषण से पता चला है कि बिहार, झारखंड व पश्चिम बंगाल जैसे राज्य भी आने वाले दिनों में खतरनाक जोन के रूप में उभर सकते हैं।
चेन्नई स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (आईएमएससी) ने चेताया है कि बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में 29 अप्रैल तक कुल संक्रमितों की संख्या 1,200 से भी कम थी। हालांकि, ‘रिप्रोडक्शन नंबर’ के आधार पर देखें तो बीते कुछ दिनों में तीनों राज्यों में कोरोना के मरीज सबसे तेजी से बढ़े हैं। ‘रिप्रोडक्शन नंबर’ किसी संक्रमित के संपर्क में आने के बाद वायरस के शिकार हुए औसत मरीजों की संख्या दर्शाता है।
अभी तीनों राज्यों में 4 प्रतिशत से कम संक्रमित
बुधवार तक पश्चिम बंगाल में कोरोना के 696, बिहार में 383 और झारखंड में 107 पुष्ट मामले दर्ज किए गए थे। भारत में कुल संक्रमितों में तीनों राज्यों की हिस्सेदारी चार फीसदी से भी कम थी।
40 प्रतिशत से ज्यादा मामले महाराष्ट्र और गुजरात में
महाराष्ट्र में बुधवार तक कोरोना से संक्रमित 9,915 मरीज सामने आ चुके थे। गुजरात में यह संख्या 4,082 थी। इस हिसाब से दोनों राज्यों की कुल संक्रमण में हिस्सेदारी 40 फीसदी से भी ज्यादा थी।
पश्चिम बंगाल को लेकर सबसे ज्यादा चिंता
आईएमएससी के सीताभ्र सिन्हा ने कहा, मार्च के अंत में पश्चिम बंगाल में कोरोना के मामले थमते नजर आ रहे थे, लेकिन अब राज्य महाराष्ट्र की राह पर बढ़ता नजर आ रहा है। बड़े राज्यों में संक्रमितों की संख्या दोगुनी होने की सबसे तेज दर पश्चिम बंगाल में ही है।
बिहार में सबसे ज्यादा ‘रिप्रोडक्शन नंबर’
सिन्हा के मुताबिक लॉकडाउन से पहले देश में कोरोना का ‘रिप्रोडक्शन नंबर’ 1.83 था। 20 से 27 अप्रैल के बीच की अवधि में यह घटकर 1.29 पर पहुंच गया। बिहार में रिप्रोडक्शन दर 2.03, झारखंड में 1.87, पश्चिम बंगाल में 1.52, महाराष्ट्र में 1.5 और गुजरात में 1.38 है।
तीन शहरों में सबसे ज्यादा कहर
महाराष्ट्र में कुल संक्रमण में 66 प्रतिशत और कुल मौतों में 61 प्रतिशत हिस्सेदारी मुंबई की है। गुजरात में फिलहाल दर्ज 67 प्रतिशत संक्रमित और 71 प्रतिशत मौतें अहमदाबाद में हुई है। मध्य प्रदेश में अब तक मिले 57.5 प्रतिशत मरीज इंदौर के हैं। राज्य में 52.4 प्रतिशत मौतें भी यहीं हुईं।
हिमालयी राज्यों में कम प्रकोप
उत्तराखंड में बुधवार तक कोरोना के 758 मरीज मिले थे, जिनमें से 124 ठीक होकर घर लौट चुके हैं, जबकि 22 की मौत हो गई है। वहीं, जम्मू-कश्मीर में वायरस की जद में आए मरीजों की संख्या 581 और हिमाचल प्रदेश में 40 है। दोनों जगहों पर संक्रमण से उबरने वाले मरीजों की तादाद क्रमश 192 और 25 है। वहीं, मौतों की बात करें तो जम्मू-कश्मीर में आठ, जबकि हिमाचल प्रदेश में एक शख्स ने कोरोना के चलते दम तोड़ा।

 

 

कोरोना वायरस: लॉकडाउन में और दुकानें खोलने के लिए आए निर्देश



कोरोना वायरस: लॉकडाउन में और दुकानें खोलने के लिए आए निर्देश – प्रेस रिव्यू

कोरोना

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने शुक्रवार देर रात दिशा निर्देश जारी करते हुए नगर पालिका के अंदर और बाहर आने वाली दुकानों को खोलने को लेकर नियमों में ढील दी.
द इंडियन एक्सप्रेस अख़बार के अनुसार, एक ओर जहां अहमदाबाद, सूरत, हैदराबाद और चेन्नई के इलाक़े 'बड़े हॉटस्पॉट ज़िले या उभरते हॉटस्पॉट' बनकर उभरे हैं वहीं दूसरी ओर सरकार ने ग्रामीण और शहरी इलाक़ों में दुकानों को खोलने को लेकर नियमों में ढील दी है.
हालांकि, यह दिशा निर्देश कोविड कंटेनमेंट ज़ोन और हॉटस्पॉट में लागू नहीं होंगे.
नए दिशा निर्देश के अनुसार, लॉकडाउन के दौरान ग्रामीण इलाक़ों के मार्केट कॉम्प्लेक्स और रिहायशी इलाक़ों में सभी दुकानें खुल सकेंगी. नगर निगम की सीमा के बाहर सभी इलाक़ों को ग्रामीण इलाक़ा माना जा सकता है लेकिन इसमें शराब की दुकानें नहीं खुलेंगी.
मॉल और बड़े शॉपिंग कॉम्प्लेक्स अब भी ग्रामीण और शहरी इलाक़ों में नहीं खुल सकेंगे.

डिज़ास्टर मैनेजमेंट क़ानून के तहत राज्य इस दिशा निर्देश को चाहे तो नहीं भी लागू कर सकते हैं.
इस नए दिशा निर्देश को ग्रामीण क्षेत्र में लघु अर्थव्यवस्था को वापस खोलने के तौर पर देखा जा रहा है.
वाणिज्यिक और निजी प्रतिष्ठानों की श्रेणी के तहत अब दुकानें खुल सकती हैं. इसमें नगर पालिका के अंतर्गत आने वाले शहरी क्षेत्र शामिल हैं. लेकिन इसमें भी सिर्फ़ वही दुकानें खुल सकेंगी जो 'राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के दुकान एवं स्थापना अधिनियम' के तहत रजिस्टर्ड होंगी.

इसका अर्थ ये हुआ कि शराब की दुकानों समेत वो दुकानें नहीं खुल सकेंगी जो किसी और अधिनियम के तहत रजिस्टर्ड होंगी क्योंकि शराब की दुकान का रजिस्ट्रेशन एक्साइज़ क़ानून के तहत होता है.
शहरी क्षेत्र के मार्केट कॉम्प्लेक्स, सिंगल ब्रैंड और मल्टि ब्रैंड मॉल में मौजूद दुकानें अब भी नहीं खुल सकेंगी. हालांकि, नगर पालिका के बाहर क्षेत्र की 'आवासीय कॉम्प्लेक्स और मार्केट कॉम्प्लेक्स समेत सभी दुकानें' खुल सकेंगी.
इसके तहत दुकानों में सिर्फ़ '50 फ़ीसदी कर्मचारियों की क्षमता' ही काम करेगी और जिनको 'मास्क पहनना और सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखना' अति आवश्यक होगा.
वहीं, केंद्र ने गुजरात, तेलंगाना और तमिलनाडु के चार ज़िलों को निगरानी में रखा है जहां 5,000 से अधिक कोरोना संक्रमण के मामले हैं. 

डॉक्टर हर्षवर्धन

'ख़राब रैपिड एंटीबॉडी टेस्टिंग किट को वापस भेजेंगे'

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन ने कहा है कि कोरोना वायरस के टेस्ट के लिए विदेशों से मंगाई गई जिन भी रैपिड एंटीबॉडी टेस्टिंग किट में ख़ामी पाई गई है उनको वापस भेजा जाएगा, चाहे वो चीन से आई हो या कहीं और से.
अंग्रेज़ी अख़बार टाइम्स ऑफ़ इंडिया का कहना है कि वीडियों कॉन्फ़्रेंसिंग के दौरान केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने यह बातें कहीं.

कोविड-19 को लेकर किए जा रहे प्रयासों की समीक्षा करते हुए उन्होंने कहा, "एंटीबॉडी टेस्टिंट किट्स अगर ठीक से काम नहीं कर रही हैं तो उन्हें वापस किया जाएगा, चाहे वो चीन से आई हों या किसी और देश से. हमने किट के लिए अभी तक भुगतान नहीं किया है."
डॉक्टर हर्षवर्धन ने कहा कि टेस्ट के परिणाम अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग हो सकते हैं और इन पर भरोसा नहीं किया जा सकता है. इसके परिणाम कितने सटीक हैं विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी इस पर टिपप्णी नहीं की है. टेस्ट और किट कितने सक्षम हैं आईसीएमआर इसकी समीक्षा कर रहा है और वह जल्द ही नए दिशा निर्देश के साथ सामने आएगा.

 दिल्ली दंगे

दिल्ली दंगे: छात्र नेता, पीएफ़आई पुलिस के रडार में

फ़रवरी में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों के मामले में दिल्ली पुलिस पॉप्युलर फ़्रंट ऑफ़ इंडिया (पीएफ़आई) और जामिया कॉर्डिनेशन कमिटी (जेसीसी) के कई सदस्यों पर कार्रवाई करने की तैयारी में है.
अंग्रज़ी अख़बार इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, जामिया मिल्लिया इस्लामिया के दो छात्रों और जेएनयू के पूर्व छात्र उमर ख़ालिद समेत चार लोगों पर ग़ैर-क़ानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम के तहत मामला दर्ज करने के बाद दिल्ली पुलिस कुछ और लोगों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने जा रही है.
अख़बार ने सूत्रों के हवाले से लिखा है कि दिल्ली पुलिस पीएफ़आई, जेसीसी, पिंजरा तोड़, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन के कई सदस्यों समेत दिल्ली विश्वविद्यालय और जेएनयू के पूर्व और वर्तमान छात्रों पर कार्रवाई कर सकती है.
इन सबके अलावा पुलिस की रडार में एक प्रोफ़ेसर भी है.
पुलिस सूत्रों का कहना है कि उसने जिन नौ लोगों को गिरफ़्तार किया है उनकी वॉट्सअप चैट से मालूम चला है कि ये सभी संगठन एक-दूसरे के संपर्क में थे.



 

सेप्सिवैक दवा, जिससे कोरोना के इलाज की है उम्मीद

सेप्सिवैक दवा, जिससे कोरोना के इलाज की है उम्मीद

 कोरोना वायरस

कोरोना वायरस (कोविड19) के इलाज के लिए लगातार दवाई और वैक्सीन बनाने की कोशिश की जा रही है. दुनिया भर में इसके लिए प्रयास हो रहे हैं.
इन्हीं कोशिशों में कुछ दवाइयों का ट्रायल किया जा रहा है जो कोविड19 के इलाज में मदद कर सकती हैं.
भारत में हाल ही में एक नई दवाई के क्लीनिकल ट्रायल को मंजूरी दी गई है. ये दवाई है सेप्सिवैक (Sepsivac).
इस दवाई का इस्तेमाल ग्राम नेगेटिव सेप्सिस बीमारी के इलाज में किया जाता है. 21 अप्रैल को इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च ने इस संबंध में जानकारी दी.
स्वास्थ्य मंत्रालय के सुंयक्त सचिव लव अग्रवाल ने बताया, “काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रीयल रिसर्च (सीएसआईआर) कोविड19 के गंभीर रूप से बीमार मरीज़ों में मृत्यु दर कम करने के लिए एक दवाई की क्षमता का मूल्यांकन करने के लिए क्लिनिकल ट्रायल की शुरुआत करेगा. ग्राम नेगेटिव सेप्सिस के मरीजों और कोविड19 मरीजों में क्लिनिकल लक्षणों की समानता होने के कारण ड्रग कंट्रोलर ऑफ इंडिया (डीसीजीआई) ने ट्रायल की अनुमति दे दी है जो जल्दी ही कई अस्पतालों में शुरू किया जाएगा.”


सेप्सिवैक के ट्रायल के लिए तीन अस्पताल चुने गए हैं. इनमें पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च, चंडीगढ़, एम्स दिल्ली और भोपाल शामिल हैं. यहां पर 50 कोविड19 के मरीज़ों पर सेप्सिवैक का परीक्षण किया जाएगा.
सीएसआईआर के महानिदेशक डॉक्टर शेखर सी. मंडे बताते हैं, “कैडिला फार्मास्यूटिकल्स लिमिटेड ने इस दवाई का निर्माण किया है और सीएसआईआर के सहयोग से तीन अस्पतालों में परीक्षण किया जाएगा. तीन में से एक अस्पताल को एथिक्स कमिटी से अनुमति मिल गई है. बाकी दो को मंज़ूरी मिलना बाकी है. जैसे ही अनुमति मिल जाएगी वैसे ही हम ट्रायल शुरू करवा देंगे. कोविड19 के गंभीर मामलों वाले 50 मरीज़ों पर ये ट्रायल किया जाएगा.”

कोरोना वायरस


तीन तरह के ट्रायल
सीएसआईआर ने डीसीजीआई से तीन अलग-अलग ट्रायल के लिए अनुमति मांगी थी. पहले ट्रायल में गंभीर मामलों वाले मरीजों पर परीक्षण होगा.
दूसरे में, जो मरीज आईसीयू में नहीं हैं लेकिन कोविड19 का इलाज करा रहे हैं उन पर थोड़ा बड़ा परीक्षण होगा.
तीसरे ट्रायल में, जो मरीज ठीक हो चुके हैं, उन्हें ये दवा देकर दुबारा कोविड19 होने से रोका जा सके, इसके लिए परीक्षण किया जाएगा.
सीएसआईआर का कहना है कि फिलहाल साफतौर पर ऐसे प्रमाण नहीं मिले हैं कि ठीक होने के बाद फिर से कोविड19 हुआ हो. हालांकि, इन तीनों ट्रायल के लिए मंज़ूरी मिल चुकी है. पहले ट्रायल में मरीज़ों की संख्या कम है तो इसके दो-तीन महीनों में नतीजे आ सकते हैं.
सेप्सिवैक दवा का निर्माण
फिलहाल सेप्सिवैक दवा एंटी ग्राम सेप्सिस में इस्तेमाल होती है.
अहमदाबाद की कैडिला फार्मास्यूटिकल्स ने सेप्सिवैक दवा का निर्माण किया है.
इस दवा का निर्माण सीएसआईआर के सहयोग से ग्राम-नेगेटिव सेप्सिस के मरीज़ों के इलाज के लिए किया गया था. ये प्रोजेक्ट सीएसआईआर की ‘न्यू मिलेनियम इंडियन टेक्नोलॉजी’ पहल के तहत चलाया गया था.
कंपनी को ग्राम नेगेटिव सेप्सिस के लिए इस दवा के क्लीनिकल ट्रायल में सफलता मिली थी.
कंपनी की वेबसाइट पर लिखा है, “सेप्सिवैक में माइकोबैक्टीरियम डब्ल्यू होता है जो सेप्सिस के मरीज़ों में प्रतिरक्षा (इम्यूनिटी) प्रतिक्रिया को नियंत्रित करता है. इस दवाई को सेप्सिस और सेप्टिक शॉक में इम्यूनोथेरेपी के इलाज के लिए डीसीजीआई से अनुमति प्राप्त है. इसके आकस्मिक ट्रायल में सेप्सिस के मरीज़ों में मृत्यु दर में 11 प्रतिशत पूर्ण कमी और 55.5 प्रतिशत सापेक्ष कमी देखी गई है. सेप्सिवैक के कारण वेंटिलेटर पर, आईसीयू में, अस्पताल में कम रहना पड़ता है.”
डॉक्टर शेखर मंडे भी कहते हैं कि सेप्सिस के ट्रायल में ये पाया गया था कि सेप्सिवैक कुल मृत्यु दर को 50 प्रतिशत से कम ले आता है. ये इंसान की प्रतिरक्षा प्रणाली को बूस्ट करता है यानी ताकत देता है. इसलिए कोविड19 के लिए भी इसके क्लीनिकल ट्रायल पर विचार किया गया.

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कैसे काम करती है सेप्सिवैक
इस ट्रायल का आधार है कि एंटी ग्राम सेप्सिस और कोविड19 के लक्षणों में कुछ समानता है इसलिए सेप्सिवैक दवा कोविड19 में भी मदद कर सकती है.
ऐसे में जानते हैं कि ये समानता क्या है और सेप्सिवैक दवा इसमें कैसे काम करती है.
सबसे पहले जानते हैं कि सेप्सिस क्या है. सेप्सिस एक ऐसी बीमारी है जो शरीर में किसी संक्रमण से होती है. इसमें हमारी रोग प्रतिरोधक प्रणाली अत्यधिक सक्रिय हो जाती है.
बीमारी की शुरुआत शरीर में किसी प्रकार के बैक्टीरियल संक्रमण से होती है. जैसे शरीर के किसी हिस्से में खरोंच या कट जाना, कीड़े का काट लेना.
लेकिन यदि संक्रमण शरीर में तेज गति से फैलने लगता है तो प्रतिरक्षा प्रणाली इसे रोकने के लिए उससे भी तेज गति से काम करना शुरू कर देती है.
ऐसे में प्रतिरक्षा प्रणाली वायरस के साथ-साथ स्वस्थ कोशिकाओं पर भी हमला करना शुरू कर देती है. इसकी वजह से शरीर में कई अंग काम करना बंद करने लगते है जैसे किडनी, लीवर आदि. इसमें मौत भी हो सकती है.
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क्या होता है ग्राम नेगेटिव सेप्सिस
सीएसआईआर की जम्मू स्थित लैब के निदेशक डॉक्टर राम विश्वकर्मा बताते हैं, “बैक्टीरियल इंफेक्शन दो तरह के होते हैं- एक ग्राम नेगेटिव और दूसरा ग्राम पॉजिटिव. सेप्सिस भी ग्राम नेगेटिव और ग्राम पॉजिटिव दोनों हो सकता है. ये दोनों अलग-अलग तरह के बैक्टीरिया से होते हैं. ग्राम नेगेटिव बैक्टीरिया सबसे खतरनाक होते हैं. हमारे पास उनकी ज़्यादा दवाइयां नहीं हैं. इसमें 50 से 60 प्रतिशत मामलों में मौत हो जाती है. अधिकतर एंटी-बायोटिक ग्राम पॉजिटिव के लिए हैं.”
“ग्राम नेगेटिव सेप्सिस में प्रतिरक्षा प्रणाली अतिसक्रिय हो जाती है और शरीर को नुक़सान पहुंचाने लगती है. इसे साइटोकाइन स्ट्रॉम भी कहा जाता है. कोविड19 के गंभीर मामलों में भी बिल्कुल यही देखने को मिला है. इसमें जब संक्रमण बहुत ज़्यादा बढ़ जाता है तो शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली अतिसक्रिय हो जाती है. हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली उलझन में आ जाती है और वो स्वस्थ कोशिकाओं पर भी हमला कर देती है और इससे शरीर के अंग खराब होना शुरू हो जाते हैं.”
डॉक्टर राम विश्वकर्मा बताते हैं कि बीमारी में सेप्सिवैक शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ाता है. प्रतिरक्षा प्रणाली के कई कॉम्पॉनेंट होते हैं. जो फायदेमंद इम्यूनिटी है ये दवाई उनको बढ़ाने में मदद करेगी और जो इम्यूनिटी अतिसक्रिय हो गई है उसे नियंत्रित करेगा. इम्यूनिटी के बिना इंसान ज़िंदा नहीं रह सकता लेकिन अगर अतिसक्रिय हो गई तो ये मार देती है.
डॉक्टर राम विश्वकर्मा कहते हैं, “एक अच्छी बात ये है कि सेप्सिवैक को ग्राम नेगेटिव सेप्सिस के लिए अनुमति मिल चुकी है. जब एक बार किसी दवाई को अनुमति मिल जाती है तो इसका मतलब है कि वो इंसानों के लिए सुरक्षित है. अब हमें ये देखना है कि ये दवाई कोविड19 में कोई फायदा कर सकती है या नहीं. इसे रिपर्पजिंग बोलते हैं यानी पुन: एक और उद्देश्य के लिए इस्तेमाल होना. बिल्कुल नई दवाई बनाने में सालों लग जाते हैं.”





कोरोना वायरस: मौत और मातम के बीच काम करने वाले डॉक्टरों ने बताया अपना अनुभव

कोरोना वायरस: मौत और मातम के बीच काम करने वाले डॉक्टरों ने बताया अपना अनुभव

कोरोना वायरस, डॉक्टर

डॉ. मिलिंद बाल्दी उस वक़्त कोविड-19 वॉर्ड में ड्यूटी पर थे जब 46 साल के एक शख़्स को सांस लेने की समस्या के साथ व्हील चेयर पर लाया गया.
वह व्यक्ति काफ़ी डरा हुआ था और लगातार एक ही सवाल पूछ रहा था, "क्या मैं ज़िंदा बच जाऊंगा?"
वो गुहार लगा रहे थे, "कृपया मुझे बचा लो, मैं मरना नहीं चाहता."
डॉ. बाल्दी ने भरोसा दिया कि वो बचाने की हरसंभव कोशिश करेंगे. यह दोनों के बीच आख़िरी बातचीत साबित हुई. मरीज़ को वेंटिलेटर पर रखा गया और दो दिन बाद मौत हो गई.
इंदौर के अस्पाल में जब मरीज़ को लाया उसके बाद के डरावने 30 मिनट को याद करते हुए डॉक्टर बाल्दी ने बताया, "वह मेरा हाथ पकड़े रहा. आँखों में डर भी था और दर्द भी. मैं उस चेहरा कभी नहीं भूल पाऊंगा."

 

उस मरीज़ की मौत ने डॉ. बाल्दी पर गहरा असर डाला है. उन्होंने बताया, "उसने मेरी आत्मा को अंदर से हिला दिया और दिल में एक शून्य छोड़ गया."
बाल्दी जैसे डॉक्टरों के लिए क्रिटिकल केयर वॉर्ड में मरीज़ों को मरते देखना कोई नई बात नहीं है. लेकिन वो कहते हैं कि मनोवैज्ञानिक तौर पर कोविड-19 वॉर्ड में काम करने की तुलना किसी से नहीं हो सकती.

डॉ. मिलिंद बाल्दी
डॉ. मिलिंद बाल्दी
अधिकांश कोरोनावायरस मरीज़ों को आइसोलेशन में रखा जाता है. इसका मतलब है कि गंभीर रूप से बीमार होने पर अंतिम समय में उनके आसपास डॉक्टर और नर्स ही मौजूद होते हैं.
दक्षिण भारत के इर्नाकुलम मेडिकल कॉलेज के क्रिटिकल केयर विभाग के प्रमुख डॉ. ए. फ़ताहुद्दीन ने कहा, "कोई भी डॉक्टर ऐसी स्थिति में रहना नहीं चाहेगा."
डॉक्टरों के मुताबिक़ भावनात्मक बातों को वे मरीज़ के परिवार वालों के साथ शेयर किया करते हैं लेकिन कोविड-19 उन्हें यह मौक़ा भी नहीं दे रहा है.
डॉ. फताहुद्दीन
डॉ. फताहुद्दी

डॉ. ए. फ़ताहुद्दीन ने बताया कि अस्पताल में कोविड-19 से मरने वाले एक मरीज़ की आंखों के सूनेपन को वे कभी नहीं भूल पाएंगे. उन्होंने बताया, "वह बात नहीं कर पा रहा था, लेकिन उसकी आंखों में दर्द और डर साफ़ नज़र आ रहा था."

उस मरीज़ के अंतिम समय में उसके आसपास कोई अपना मौजूद नहीं था. डॉ. फ़ताहुद्दीन इस बात को लेकर बेबस दिखे. लेकिन उन्हें एक उम्मीद दिखी- मरीज़ की पत्नी को भी कोरोना वायरस के इलाज के लिए इसी अस्पताल में लाया गया था.
डॉ. फताहुद्दीन उन्हें पति के वॉर्ड में लेकर आए. वहां उसने पति को गुडबाइ कहा. उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि 40 साल चली उनकी शादी का अंत अचानक इस तरह होगा.
अनुभवी डॉक्टर होने के बाद भी फताहुद्दीन ने बताया कि इस घटना उन्हें बेहद भावुक कर दिया. हालांकि उन्हें इस बात का संतोष भी है कि मरीज़ की मौत अपनी पत्नी को देखने के बाद हुई.
उन्होंने बताया, "लेकिन ऐसा हमेशा नहीं होता. कड़वा सच यही है कि कुछ मरीज़ों की मौत अपने परिजनों को गुडबाइ कहे बिना हो रही है."

डॉक्टर मीर शाहनवाज़
डॉक्टर मीर शाहनवाज़
डॉक्टरों पर भी इन सबका भावनात्मक असर होता है. ज्यादातर डॉक्टर अपने परिवार से दूर आइसोलेशन में रह रहे हैं लिहाजा परिवार की ओर से मिलने वाला भावनात्मक सहारा भी उन्हें नहीं मिल पाता है.
इसके असर के बारे में श्रीनगर के गर्वनमेंट चेस्ट हॉस्पीटल के डॉक्टर मीर शाहनवाज़ ने बताया, "हम लोगों को केवल बीमारी से ही नहीं लड़ना पड़ रहा है. हम नहीं जानते हैं कि अपने परिवार से कब मिल पाएंगे, हर पल संक्रमित होने का ख़तरा अलग है. ऐसी स्थिति में समझ में आता है कि हमलोग किस बड़े ख़तरे का सामना कर रह हैं."
इतना ही नहीं, इन तनावों के अलावा डॉक्टरों को मरीज़ों के भावनात्मक ग़ुस्से को झेलना पड़ता है.
डॉ. शाहनवाज़ ने बताया, "मरीज़ काफ़ी डरे होते हैं, हमें उन्हें शांत रखना होता है. हमें डॉक्टर के साथ-साथ उनके दोस्त की भूमिका भी निभानी होती है."
इसके अलावा डॉक्टरों को मरीज़ों के परिवार वालों को फ़ोन कॉल करने होते हैं और उनके डर और चिंताओं को भी सुनना होता है. डॉ. शाहनवाज़ के मुताबिक़ यह सब भावनात्मक रूप से काफ़ी थकाने वाला होता है.
उन्होंने कहा, "जब आप रात में अपने कमरे में पहुंचते हैं तो यह बातें आपको परेशान करती हैं. अनिश्चितता को लेकर डर भी होता है क्योंकि हमें नहीं मालूम कि हालात कितने ख़राब होंगे."

कोरोना वायरस, डॉक्टर 

शाहनवाज़ साथ में यह भी बताते हैं, "डॉक्टरों का काम दूसरों का जीवन बचाना होता है. हमलोग यह करते रहेंगे चाहे जो हो. लेकिन सच्चाई यह भी है कि हम लोग भी इंसान हैं, इसलिए हमें भी डर लगता है."
उन्होंने बताया कि उनके अस्पताल में कोरोना वायरस से हुई पहली मौत ने उनके साथियों के हिम्मत को तोड़ दिया था क्योंकि तब उन्हें पता चला था कि कोविड-19 मरीज़ को अपने परिजनों की अंतिम झलक देखने का मौक़ा भी नहीं देता है.
शाहनवाज़ ने बताया, "परिवार वाले मरीज़ के अंतिम पलों को याद रखना चाहते हैं, शिथिल पड़ती मुस्कान, कुछ अंतिम शब्द और भी कुछ जिसे सहेजा जा सके. लेकिन उन्होंने मृतक का ठीक से अंतिम संस्कार करने का मौक़ा नहीं मिलता."
डॉ. फ़ताहुद्दीन के मुताबिक़ ऐसे मनोवैज्ञानिक दबावों को समझे जाने की ज़रूरत है और इसलिए प्रत्येक अस्पताल में मरीज़ों के साथ-साथ डॉक्टरों के लिए भी एक मनोचिकित्सक को रखने की ज़रूरत है.
उन्होंने बताया, "मैंने अपने अस्पताल में ऐसा किया है. यह ज़रूरी है, नहीं तो भावनात्मक घाव इतने गहरे हो जाएंगे कि उन्हें भरना मुश्किल हो जाएगा. फ्रंटलाइन वर्करों में पोस्ट ट्रूमैटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर दिखाई देने लगे हैं."



















कोरोना वायरस: क्या देश की सबसे बड़ी मंडी के बंद होने का ख़तरा है?

कोरोना वायरस: क्या देश की सबसे बड़ी मंडी के बंद होने का ख़तरा है?

 मंडी

राजधानी दिल्ली में स्थित देश की सबसे बड़ी सब्ज़ी और फल मंडी में कोविड-19 की वजह से एक शख़्स की मौत हो चुकी है और मंडी के चार आढ़ती अस्पताल में भर्ती कराए गए हैं. 

स्थानीय प्रशासन का दावा है कि मंडी में काम करने वाले सैकड़ों लोगों की अब तक जाँच की जा चुकी है.
मंडी में कोरोना वायरस महामारी को लेकर दहशत है, लेकिन 'मंडी की क़रीब 300 दुकानें बंद करा दी गई' हैं, इस बात को दिल्ली सरकार ने अफ़वाह बताया है. मंडी के आढ़तियों ने बीबीसी से बातचीत में भी इसकी पुष्टि की.

22 मार्च 2020 को लॉकडाउन शुरू होने के बाद भी इस तरह की अफ़वाह सोशल मीडिया पर देखने को मिली थी, लेकिन पिछले दिनों मंडी में काम करने वाले 57 वर्षीय भोला नाथ की मौत से पूरे आज़ादपुर में जो तनाव फैला, उससे इस अफ़वाह को एक बार फिर बल मिला.

आज़ादपुर मंडी में जो लोग भोला नाथ को जानते थे, उनका कहना है कि वे शुगर और हार्ट के मरीज़ थे.

 

कोरोना मरीज़ों को रिस्टबैंड से ट्रैक करने की तैयारी

कोरोना मरीज़ों को रिस्टबैंड से ट्रैक करने की तैयारी

रिस्टबैंड

कोरोना संक्रमण को फैलने से रोकने में सरकार को तीन जगहों पर सबसे ज़्यादा दिक़्क़त रही है, 

• संक्रमण को ठीक करने में लगे डॉक्टर और नर्स ख़ुद संक्रमण की चपेट में आ रहे हैं
• हॉटस्पॉट एरिया में रहने वाले लोग घरों और आइसोलेशन में रहने को राज़ी नहीं हैं
• क्वारंटीन छोड़ कर लोग भाग रहें हैं, कई लोग नियमों का पालन करने को तैयार नहीं हैं. 

इन तीनों समस्याओं का तोड़ निकालने के लिए सरकार की एक कंपनी ब्रॉडकास्ट इंजिनियरिंग कंसल्टेंट इंडिया लिमिटेड ख़ुद सामने आई है. ये कंपनी भारत सरकार के सूचना और प्रसारण मंत्रालय के अंदर काम करती है.

 

 

 

 

कोरोना वायरस के संक्रमण के दौर में कैसे रखें रमज़ान के रोज़े

कोरोना वायरस के संक्रमण के दौर में कैसे रखें रमज़ान के रोज़े?

पूरी दुनिया में लाखों लोग इस साल लॉकडाउन में रमज़ान के पवित्र महीने का पालन करेंगे.

मुस्लिम धर्म मानने वाले लोग हर साल एक चंद्र मास तक सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक बिना कुछ भी खाए-पिए रहते हैं. इसे रोज़ा रखना कहते हैं. यह महीना 29 या 30 दिन का होता है.

इस दौरान मुसलमान नमाज़ पढ़ते हैं और दुआएं मांगते हैं.

मुस्लिम धर्म मानने वाले हर ऐसे वयस्क शख्स के लिए रोज़े रखना अनिवार्य है जो कि बिना कुछ भी खाए-पिए सुरक्षित रह सकता है.

लेकिन, ऐसे वक़्त में जबकि हम एक महामारी के दौर से गुज़र रहे हैं, रोज़े रखने को लेकर कुछ चिंताएं भी हैं.







कोरोना वायरस वैक्सीन: टूटी उम्मीद ट्रायल में फेल हुआ रेमडेसिवयर

कोरोना वायरस वैक्सीन: टूटी उम्मीद ट्रायल में फेल हुआ रेमडेसिवयर

 रैंडम क्लिनिकल ट्रायल में फेल

कोरोना वायरस के संक्रमण में एक प्रभावी एंटी वायरल ड्रग के फेल होने की ख़बर है.

यह पहले ही रैंडम क्लिनिकल ट्रायल में फेल हो गई. इसे लेकर दुनिया भर में उम्मीद थी. इस एंटी वायरल ड्रग का नाम रेमडेसिवयर है. चीनी ट्रायल में यह ड्रग नाकाम रही. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइज़ेशन के दस्तावेजों के इसकी जानकारी मिली है.
कुल 237 मरीज़ों में से कुछ को वो ड्रग दी गई और कुछ को प्लेसीबो. एक महीने बाद ड्रग लेने वाले 13.9% मरीज़ों की मौत हो गई जबकि इसकी तुलना में प्लेसीबो लेने वाले 12.8% मरीज़ों की मौत हुई. साइड इफेक्ट के कारण ट्रायल को पहले ही रोक दिया गया. इस ड्रग के पीछे एक अमरीकी फर्म गिलिएड साइंस था.
रेमडेसिवयर ड्रग को लेकर काफ़ी उम्मीद थी. रेमडेसिवयर ड्रग से मरीज़ में कोई सुधार देखने को नहीं मिला. मतलब रेमडेसिवयर ड्रग देने से मरीज़ के ख़ून में रोगाणु कम नहीं हुए. इसके फेल होने की रिपोर्ट को WHO ने विस्तार से प्रकाशित किया था. बाद में WHO ने कहा कि ड्राफ़्ट रिपोर्ट ग़लती से अपलोड हो गई थी और रिपोर्ट को हटा लिया.
रिपोर्ट के अनुसार यह ट्रायल 237 मरीज़ों पर किया गया. इन मरीज़ों में से 158 को रेमडेसिवयर दी गई और बाक़ी के 79 को प्लेसीबो. एक महीने बाद रेमडेसिवयर लेने वाले 13.9% मरीज़ों की मौत हो गई और प्लेसीबो लेने वाले 12.8% मरीज़ों की.''

कोरोना वायरस: ट्रंप की अजीब सलाह

कोरोना वायरस: ट्रंप की अजीब सलाह- रोगाणुनाशक का इंजेक्शन



अमरीका में कोरोना वायरस के कहर के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नई सलाह को लेकर डॉक्टरों ने कड़ी आपत्ति जताई है.
डोनाल्ड ट्रंप ने सलाह दी है कि इस पर शोध होना चाहिए कि क्या रोगाणुनाशकों को शरीर में इंजेक्ट करने से कोरोना वायरस का इलाज हो सकता है.
अमरीका में कोरोना वायरस के कारण 50 हज़ार से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और क़रीब 9 लाख लोग संक्रमित हैं. सबसे ज़्यादा प्रभावित न्यूयॉर्क प्रांत है, जहाँ 20 हज़ार से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है.
प्रेस ब्रीफिंग के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप इतने पर ही नहीं रुके. उन्होंने ये भी प्रस्ताव दे डाला कि अल्ट्रावॉयलेट लाइट से मरीज़ों के शरीर को इरेडिएट (वैसी चिकित्सा पद्धति जिसमें विकिरण का इस्तेमाल होता है) किया जा सकता है.
हालांकि उसी प्रेस ब्रीफ़िंग में डॉक्टरों ने इसे ख़ारिज कर दिया.