मस्जिद खोलने पर क्या इमरान ख़ान को डर से करना पड़ा सरेंडर
रमज़ान की शुरुआत से कुछ दिन पहले
दुनिया के अन्य देशों की तरह पाकिस्तान सरकार ने भी तय किया था कि कोविड-19
महामारी को कंट्रोल करने के लिए बनाई गई लॉकडाउन पॉलिसी को एक बार रिव्यू
किया जाएगा.
लेकिन रिव्यू के आधार पर सरकार कोई निर्णय ले पाती, उससे
पहले ही दो मौलवियों ने घोषणा कर दी कि सरकार का चाहे जो फ़ैसला हो,
रमज़ान के दौरान मस्जिदें खुली रहेंगी.
14 अप्रैल को कराची में हुई
एक प्रेस वार्ता में दो नामी धर्म गुरुओं, मुफ़्ती मुनीबुर्रहमान और
मुफ़्ती तकी उस्मानी ने कहा कि 'मस्जिदें और मदरसे अनिश्चित काल के लिए बंद
नहीं रह सकते, इसलिए रमज़ान के महीने में इन्हें खोला जाएगा और सामान्य
दिनों की तरह मस्जिदों में नमाज़ पढ़ी जाएगी.'
लॉकडाउन के दौरान भी, पाकिस्तान में स्थानीय प्रशासन को मस्जिदों पर प्रतिबंध लगाने में बहुत परेशानी का सामना करना पड़ा.
देखा
गया कि जिन मस्जिदों में भारी भीड़ जमा हो रही थी और पुलिस ने ऐसी
मस्जिदों को बंद कराने की कोशिश की, तो रूढ़िवादी लोगों के समूह ने उन्हें
दौड़ाया, उनके साथ हाथापाई की गई. सोशल मीडिया पर ऐसे कई वीडियो वायरल हुए
जिनमें पुलिस के साथ भीड़ बदसलूकी कर रही है.
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